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चूँकि वह एक क्विज़ थी, इसलिए वहाँ हर प्रश्न को गहराई से समझना मुमकिन नहीं था। लेकिन परीक्षा में सफलता केवल सही उत्तर रटने से नहीं, बल्कि उसके पीछे के पूरे कांसेप्ट को समझने से मिलती है। इसीलिए आज के इस विशेष आर्टिकल में, हम उस क्विज़ के सभी 7 VIP प्रश्नों का पूरा पोस्टमार्टम (विस्तृत व्याख्या और सटीक उत्तर) करने वाले हैं।
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि "भारत का एक राष्ट्रपति होगा"?
भारतीय संविधान के भाग-5 के अंतर्गत अनुच्छेद 52 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा। राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक होता है और वह देश की एकता, अखंडता और सुदृढ़ता का प्रतीक है।
- अनुच्छेद 51: यह अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने से संबंधित है (राज्य के नीति निदेशक तत्व)।
- अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करेगा।
- अनुच्छेद 54: इसमें राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल (Electoral College) का उल्लेख है।
- राष्ट्रपति का पद अमेरिकी संविधान से प्रभावित है, जबकि उनकी संवैधानिक स्थिति ब्रिटेन के राजा/रानी के समान है।
- राष्ट्रपति तीनों सेनाओं (थल, जल और वायु) का सर्वोच्च सेनापति (Supreme Commander) होता है।
- भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जो सबसे लंबे समय तक (1950-1962) इस पद पर रहे।
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाया जा सकता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 में राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। यदि राष्ट्रपति द्वारा "संविधान का उल्लंघन" किया जाता है, तो संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) द्वारा उन पर महाभियोग का आरोप लगाया जा सकता है। यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया (Quasi-judicial process) है।
- अनुच्छेद 56: यह राष्ट्रपति की पदावधि (Term of Office) से संबंधित है, जिसके तहत वे पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक पद पर रहते हैं। इसी अनुच्छेद में यह भी लिखा है कि उन्हें अनुच्छेद 61 के तहत हटाया जा सकता है।
- अनुच्छेद 60: इसमें राष्ट्रपति द्वारा ली जाने वाली शपथ (Oath) का प्रारूप है। राष्ट्रपति को शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) दिलाते हैं।
- अनुच्छेद 72: यह राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) से संबंधित है, जिसके तहत वे किसी भी अपराधी के दंड को क्षमा, कम या बदल सकते हैं (मृत्युदंड भी शामिल है)।
- महाभियोग का प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले राष्ट्रपति को लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
- इस प्रस्ताव पर सदन के कुल सदस्यों के कम से कम 1/4 (एक-चौथाई) सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
- महाभियोग प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग अपनी कुल सदस्य संख्या के 2/3 (दो-तिहाई) विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है।
- गौर करने वाली बात: भारत के इतिहास में आज तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है। यह प्रक्रिया अमेरिका के संविधान से ली गई है।
संसद के दोनों सदनों की 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुलाने की शक्ति किसके पास है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत जब किसी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) पर लोकसभा और राज्यसभा के बीच गतिरोध (Disagreement) उत्पन्न हो जाता है, तो उस गतिरोध को दूर करने के लिए राष्ट्रपति संसद की संयुक्त बैठक बुलाते हैं।
⚠️ विशेष ध्यान रखें: संयुक्त बैठक बुलाने का काम राष्ट्रपति का है, लेकिन इस बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) ही करते हैं!
- (A) लोकसभा अध्यक्ष: ये संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हैं (अनुच्छेद 118 के तहत)। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष इसकी अध्यक्षता करेंगे।
- (B) प्रधानमंत्री: यह देश के वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होते हैं और नीति आयोग के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन इनके पास संयुक्त बैठक बुलाने की संवैधानिक शक्ति नहीं होती।
- (C) उपराष्ट्रपति: यह राज्यसभा के पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) होते हैं। एक बात हमेशा याद रखें कि उपराष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते, इसलिए वे कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते।
- किन विधेयकों पर संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती? धन विधेयक (Money Bill - अनु. 110) और संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill - अनु. 368) के मामले में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।
- संयुक्त बैठक का कोरम (गणपूर्ति) दोनों सदनों की कुल सदस्य संख्या का 1/10 (दसवां भाग) होना अनिवार्य है।
- भारत के इतिहास में अब तक केवल 3 बार ही संसद की संयुक्त बैठक बुलाई गई है:
1. दहेज निषेध विधेयक (1961)
2. बैंकिंग सेवा आयोग विधेयक (1978)
3. आतंकवाद निवारण विधेयक - POTA (2002)
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राष्ट्रपति को 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) देता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है। इसके तहत राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Sentence) को भी पूरी तरह माफ कर सकते हैं।
- (A) अनुच्छेद 71: यह राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषयों से है। यदि उनके चुनाव को लेकर कोई विवाद होता है, तो उसकी जांच और फैसला केवल सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा किया जाता है।
- (C) अनुच्छेद 74: इसमें प्रावधान है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) होगी, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति इसकी सलाह के अनुसार ही कार्य करते हैं।
- (D) अनुच्छेद 76: यह भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) के पद से संबंधित है। महान्यायवादी देश का प्रथम देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
- राष्ट्रपति सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दी गई सजा को भी माफ कर सकते हैं, लेकिन राज्यों के राज्यपालों के पास सैन्य कोर्ट की सजा को माफ करने की शक्ति नहीं होती।
- राज्यपाल की क्षमादान शक्ति: संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को भी क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, लेकिन वे मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) नहीं कर सकते।
- राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति एक कार्यकारी शक्ति (Executive Power) है, न्यायपालिका की शक्ति नहीं। इसके खिलाफ कोर्ट में केवल तब अपील हो सकती है जब फैसला पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण हो।
राष्ट्रपति पद के निर्वाचन हेतु कौन सी पद्धति अपनाई जाती है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 55 के अनुसार, राष्ट्रपति का निर्वाचन समानुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति (Proportional Representation) के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा होता है। यह चुनाव गुप्त मतदान (Secret Ballot) के माध्यम से किया जाता है।
- (A) प्रत्यक्ष मतदान (Direct Election): इसमें जनता सीधे वोट डालकर प्रतिनिधि चुनती है, जैसे कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में होता है। राष्ट्रपति के चुनाव में जनता सीधे भाग नहीं लेती, इसलिए यह एक अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) है।
- (B) समानुपातिक प्रतिनिधित्व: इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक राज्य के मतों का मूल्य उसकी जनसंख्या के अनुपात में समान रहे और संसद व विधानसभाओं के मतों का मूल्य भी बराबर रहे।
- (C) एकल संक्रमणीय मत पद्धति: इसमें मतदाता उम्मीदवारों को वरीयता (Preference - 1, 2, 3...) के आधार पर वोट देते हैं। यदि पहली पसंद के आधार पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो मतों को दूसरी वरीयता के अनुसार ट्रांसफर कर दिया जाता है।
- राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल (अनुच्छेद 54) में कौन शामिल होते हैं? संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य, और दिल्ली व पुडुचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- विशेष बात: संसद और विधानसभाओं के मनोनीत (Nominated) सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हैं।
- राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए एक निश्चित 'निर्वाचन कोटा' (Election Quota) प्राप्त करना अनिवार्य होता है, जो कि कुल वैध मतों का 50% + 1 होता है।
- भारत के इतिहास में केवल एक बार **वी. वी. गिरि** के निर्वाचन के समय दूसरे चक्र की मतगणना (Second Preference Counting) करनी पड़ी थी।
भारत के राष्ट्रपति के पास कितने प्रकार की आपातकालीन (Emergency) शक्तियां होती हैं?
भारतीय संविधान के भाग-18 में आपातकालीन उपबंधों का उल्लेख किया गया है। राष्ट्रपति के पास संकटकाल से निपटने के लिए तीन विशेष प्रकार की आपातकालीन शक्तियां होती हैं, जिन्हें वे केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर लागू कर सकते हैं।
- 1. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) - अनुच्छेद 352: यह युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) की स्थिति में पूरे देश या उसके किसी हिस्से में लगाया जाता है।
- 2. राष्ट्रपति शासन (President's Rule) - अनुच्छेद 356: जब किसी राज्य का संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो जाता है, तो राज्यपाल की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं। इसे 'राज्य आपातकाल' भी कहते हैं।
- 3. वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) - अनुच्छेद 360: यदि देश की वित्तीय स्थिरता या साख खतरे में हो, तो राष्ट्रपति इसे लागू कर सकते हैं।
- भारत में राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) अब तक कुल 3 बार लगाया जा चुका है: 1962 (भारत-चीन युद्ध), 1971 (भारत-पाक युद्ध), और 1975 (आंतरिक अशांति के आधार पर)।
- भारत में पहली बार राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) 1951 में पंजाब राज्य में लगाया गया था।
- सबसे महत्वपूर्ण बात: भारत के इतिहास में आज तक एक बार भी वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) लागू नहीं किया गया है।
- भारतीय संविधान में आपातकाल के प्रावधान मुख्य रूप से जर्मनी के वीमर संविधान से प्रभावित हैं, जबकि वित्तीय आपातकाल का प्रावधान अमेरिका से लिया गया है।
भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु कितने वर्ष होनी चाहिए?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 58 में राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताओं (Qualifications) का उल्लेख है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति भारत का राष्ट्रपति तभी बन सकता है जब वह भारत का नागरिक हो, अपनी 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, और लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
- 25 वर्ष: लोकसभा सदस्य (MP) और राज्यों के मुख्यमंत्री या विधायक (MLA) बनने की न्यूनतम आयु।
- 30 वर्ष: राज्यसभा सदस्य (MP) और राज्यों की विधान परिषद के सदस्य (MLC) बनने की न्यूनतम आयु।
- 35 वर्ष: राष्ट्रपति के साथ-साथ भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपाल (Governor) बनने के लिए भी न्यूनतम आयु 35 वर्ष ही अनिवार्य है।
- भारतीय संविधान में राष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु (35 वर्ष) तो तय है, लेकिन अधिकतम आयु सीमा (Maximum Age Limit) या रिटायरमेंट की उम्र का कोई भी उल्लेख नहीं है। कोई व्यक्ति जितनी भी बार चाहे इस पद पर चुना जा सकता है।
- नीलम संजीव रेड्डी भारत के इतिहास में सबसे कम उम्र (64 वर्ष की आयु) में बनने वाले और निर्विरोध (Unopposed) चुने जाने वाले एकमात्र राष्ट्रपति थे।

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